STORY BY PRACHI
यह एक "चतुर चिड़िया" की लंबी कहानी है, जो अपनी बुद्धिमत्ता और साहस से जंगल के सभी जानवरों को एक लालची शिकारी से बचाती है। यह कहानी हमें सिखाती है कि मुसीबत में घबराने के बजाय सूझबूझ से काम लेना चाहिए।
चतुर चिड़िया की कहानी
एक घने और हरे-भरे जंगल में चंचल नाम की एक बहुत ही चतुर और मेहनती चिड़िया रहती थी। चंचल अपने सुरीले गानों के लिए पूरे जंगल में मशहूर थी। उसने एक ऊँचे और मजबूत पेड़ की सबसे ऊँची डाल पर अपना घोंसला बनाया था। उस घोंसले में उसके तीन छोटे-छोटे अंडे थे, जिनसे उसे बहुत प्यार था। वह हर पल अपने अंडों की रक्षा करती थी।
उसी जंगल के किनारे एक गाँव था, जहाँ एक बहुत लालची शिकारी रहता था। एक दिन, वह शिकारी जंगल में पक्षियों को पकड़ने आया। उसकी नज़र चंचल के घोंसले पर पड़ी। अंडों को देखकर उसके मन में लालच आ गया। उसने सोचा, "ये अंडे तो बहुत कीमती हैं, इन्हें बेचकर मुझे खूब पैसे मिलेंगे।"
जब चंचल खाने की तलाश में थोड़ी दूर गई, तभी शिकारी ने पेड़ पर चढ़ने की कोशिश की। चंचल बहुत सतर्क थी। जैसे ही वह वापस लौटी, उसने शिकारी को पेड़ के पास देखा। उसने तुरंत स्थिति समझ ली और घबराए बिना एक योजना बनाई।
चंचल जोर-जोर से चिल्लाने लगी, "बचाओ! बचाओ! शिकारी आया है!" उसकी आवाज़ सुनकर जंगल के अन्य पक्षी—तोते, मैना, कबूतर—और जानवर—बंदर, हिरण—वहाँ इकट्ठा हो गए। चंचल ने सबको बताया कि शिकारी उसके अंडों को चुराना चाहता है।
शिकारी अभी पेड़ पर आधा ही चढ़ा था कि बंदरों की एक टोली ने उसे घेर लिया। एक बंदर ने जोर से पेड़ की डाली हिलाई, जिससे शिकारी डरकर नीचे गिर गया। तभी, जंगल के हिरणों ने आकर उसे डराना शुरू कर दिया। शिकारी इतना डर गया कि वह अपनी जान बचाकर वहां से भाग गया।
चंचल के अंडों की रक्षा हो गई। उस दिन चंचल ने सबको यह सिखाया कि चतुराई, साहस और एकता से किसी भी मुसीबत का सामना किया जा सकता है।

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